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झूला  : पुं० [सं० दोल या हिं० झूलना] १. पेड़ की डाल, छत या और किसी ऊँचे स्थान में बाँधकर लटकाई हुई दोहरी या चौहरी जंजीरें या रस्सियाँ जिन पर तख्ता, पीढ़ा और कोई आसन लगाकर लोग खड़े होकर या बैठकर आनन्द और मनोविनोद के लिए झूलते हैं। क्रि० प्र०–झूलना।–डालना।–पड़ना। २. जंगली या पहाड़ी नदियाँ और नाले पार करने के लिए उनके दोनों किनारों पर किसी ऊँचे खंभों, चट्टानों या पेड़ों की डालों पर रस्से बाँधकर बनाया जानेवाला वह पुल जिसका बीचवाला भाग अधर में लटकता और इसीलिए प्रायः इधर उधर झूलता रहता है। झूलना पुल। जैसे–लछमन झूला। ३. यात्रा आदि में काम आनेवाला वह बिस्तर जिसके दोनों सिरे दो ओर रस्सियों से वृक्षों की डालों आदि में बाँध देते हैं और जो उक्त प्रकार से बीच में झूलता या लटकता रहता है। ४. हवा का ऐसा झटका या झोंका जिससे चीजें इधर-उधर झूलने या हिलने-डोलने लगें। (क्व०) ५. दे० झूल। पुं० [?] तरबूज। पुं०=झुल्ला (स्त्रियों का पहनावा)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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