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अँधेरा  : पुं० [सं० अंधकार, पा० अंधकारो, प्रा० अंधयार>अंधार, ब० आंधार, ओ० अधार, गु० अंधारू, अंधेरू, सिं अंधारू, पं ०अन्हेरा, मै० अन्हरिया, सिंह अन्दुर] १. वह समय या स्थिति जिसमें प्रकाश या रोशनी न हो। अंधकार। पद—अंधेरा गुप्प (घप्प)=ऐसा अंधकार जहाँ कुछ सूझता ही न हो। अंधेरा पाख या पक्ष=चांद्र मास का कृष्ण पक्ष। अँधेरे घर का उजाला=(क) वह जो अन्धकार को दूर कर दे। (ख) कीर्ति बढ़ाने वाला शुभ। (ग) अंधेरे उजले=उपयुक्त-अनपयुक्त समय में समय कुसमय। अँधेरे मुँह या मुँह अँधेरे=पौ फटते समय। बहुत तड़कें। २. धुंधलापन। ३. उदासी की स्थिति। ४. ऐसी अवस्था जिसमें मनुष्य हताश होकर यह न समझ सके कि अब क्या करना चाहिए। वि० (स्त्री० अँधेरी) जिसमें प्रकाश बहुत कम हो न हो या।
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अँधेरा-पक्ष  : पुं० [हिं० अंधेरा+पक्ष] पूर्णिमा से अमावस्या तक के १५ दिन। चांद्र मास का कृष्ण पक्ष।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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