नेटवर्क - सहयोग कौर Network - Hindi book by - Sahyog Kaur

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नेटवर्क

सहयोग कौर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :0
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 3
आईएसबीएन :

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दो अथवा दो से अधिक कम्पूयटरों की आपसी बातचीत को कम्प्यूर नेटवर्क कहते हैं

कम्प्यूटर अपने से भिन्न किसी अन्य (एक अथवा कई) कम्प्यूटरों से जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए जिस प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं उसे नेटवर्क कहते हैं। सरल शब्दों में कहें तो कम्प्यूटर नेटवर्क सह संचालन (कोआपरेटिव सोसाइटी) समिति की तरह होते हैं। प्रत्येक कम्प्यूटर अपने आप में स्वतंत्र इकाई होता है, कई कम्प्यूटर आपस में मिलजुल कर काम करते हैं तो उसे नेटवर्क कहते हैं। इंजीनियरिंग और टेक्नॉलॉजी के संसार में सबसे पहले जिस नेटवर्क का प्रयोग आरंभ हुआ वह टेलीफोन और टेलीग्राफ का था। विश्व में एक स्थान पर बैठा हुआ व्यक्ति तारों पर भेजे गये विद्युत संकेतों का प्रयोग करके छोटे-छोटे संदेश अपने आगे वाली कड़ी के संचालक (आपरेटर) को भेजा करता था। आगे वाली कड़ी का संचालक इसी प्रक्रिया को दोहराता था। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती थी, जब तक संकेत अपने मंतव्य तक पहुँच नहीं जाता था। इंटरनेट पर अथवा इंट्रानेट पर जुड़े हुए कम्प्यूटर भी कुछ इसी प्रकार की विधि का प्रयोग करते हैं। विशेष बात केवल यह है कि टेलीफोन, टेलीग्राफ आदि की अपेक्षा आज के कम्प्यूटर कई भाषाओँ का प्रयोग करते हुए कठिन कार्यों को करते हैं, इसलिए उनका जाल (नेटवर्क) अधिक पेचीदा होता है।

एक कम्प्यूटर दूसरे कम्प्यूटर से बातचीत करने के लिए नेटवर्क केबल अथवा वायरलैस संकेतों का प्रयोग करते हैं।

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