आई ओ एस - कर्मेन्द्र कुमार iOS - Hindi book by - Karmendra Kumar

आपरेंटिग सिस्टम >> आई ओ एस

आई ओ एस

कर्मेन्द्र कुमार

प्रकाशित वर्ष : 2018

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एप्पल यंत्रो का कार्यवाहक (आपरेटिंग सिस्टम ) सॉफ्टवयेर

अपने संपर्क में आने वाले लोगो की व्यक्तिगत सूचना जैसे उनका पता, फोन नंबर और ई-मेल का पता आदि व्यवस्थित रूप में रखने के लिए व्यक्तिगत सचिव अथवा सेवक का काम कर सकने वाला सबसे प्रसिद्ध यंत्र रोलोडेक्स कहलाया। इस दिशा में पाम इनकार्पोरेटेड द्वारा निर्मित पाम पाइलट भी एक समय बहुत प्रचलन में था, पाम पाइलट का प्रयोग करने वाले लोग आईटी की दुनिया में आधुनिक समझे जाते थे। पाम पाइलट पाम ओएस का प्रयोग करता था। इसी पाम ओएस का प्रयोग करते हुए इस यंत्र में फोन की सुविधा जोड़ते हुए ब्लैक बैरी ने लगभग 7-8 वर्षों तक बाजार में धूम मचा रखी थी। इस बीच एप्पल कंपनी द्वारा निर्मित नैनो और फिर कुछ बड़ी स्क्रीन वाला आईपॉड संगीत प्रेमियों को अपने साथ हर क्षण हजारों गाने रखने और सुनने की सुविधा दे रहा था। एमपी3 गानों की स्वावाभिक सफलता का लाभ उठाने के लिए एप्पल कंपनी ने जो कि सन् 2000 के आस-पास बरबादी के कगार पर थी, सन् 2005 में अपना एक मोबाइल फोन बाजार में उतारने का निर्णय लिया। इस फोन को ग्राहकों तक पहुँचाने से पहले एप्पल कंपनी ने लोगों की आवश्यकताओं और उनकी विशेष माँगें, इन दोनों पर बहुत खोज-बीन की। इसी खोज-बीन का परिणाम एप्पल फोन के रूप में प्रयोगकर्ताओं को मिला। प्रयोगकर्ताओं की माँग और मैक ओएस पर अपनी अच्छी पकड़ के कारण ही एप्पल ने आईओएस का प्रयोग अपने फोन के लिए किया। आईओएस नामक एक और ओएस पहले से ही बाजार में प्रचलित था जिसका मुख्य प्रयोजन नेटवर्क यंत्रों के संचालन के लिए किया जाता था। इस ओएस का पेटेंट सिस्को के पास सुरक्षित था। सन् 2010 में सिस्को ने एप्पल को आईओएस के नाम के प्रयोग की अनुमति दे दी। उस समय तक इस आपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग करते हुए सिस्को को लगभग दो दशक हो चुके थे।

एप्पल ने सन् 2007 में मोबाइल फोन (चलित दूरभाष) का निर्माण करते समय एक नये आपरेटिंग सिस्टम का निर्माण किया, जिसे इन चलित यंत्रों के लिए बनाया गया था। चूँकि इस समय तक प्रचलित सभी प्रकार के डेस्कटाप अथवा व्यक्तिगत संगणकों के आपरेटिंग सिस्टम विशेषतः उनके संचालन के लिए बनाए गये थे, साथ ही उस समय निर्माणाधीन आई फोन के संचालन की आवश्यकताएं भिन्न थीं। उदाहरण के लिए सामान्य डेस्कटाप में जानकारी अथवा प्रयोगकर्ता की आवश्यकताएँ की बोर्ड से कम्प्यूटर को दी जाती हैं। मोबाइल फोन में की-बोर्ड टच स्क्रीन का ही एक हिस्सा होता है और केवल पावर बटन तथा वाल्यूम के बटन ही सामान्य बटनों जैसे लगते हैं। हालाँकि उन्हें भी टच स्क्रीन का हिस्सा बनाया जा सकता है, परंतु आई फोन के निर्माण करने वाले, मनुष्यों की प्रयोगधर्मिता और आदत की मजबूरी इन दोनों बातों का लाभ लेना चाहते थे। इसके अतिरिक्त टच स्क्रीन बिगड़ जाने की स्थिति में फोन को बलपूर्वक निर्देश देने के लिए साधारण स्विचों की तरह यांत्रिक विधि से काम करने वाले बटन भी आवश्यक बन गये।

इसके अतिरिक्त चलित यंत्रों में कई निर्देश उंगलियों और अंगूठे के प्रयोग से होते हैं, जैसे उंगली सरकाना (स्वाइप), टकठकाना (टैप), च्यूंटी लेना (पिंच) और उंगलियाँ फैलाना (रिवर्स पिंच) आदि। इस प्रकार की क्रियाओं की आवश्यकता केवल टच स्क्रीन और वह भी चलित फोनों की छोटी स्क्रीन में पड़ती है। उपर्युक्त इन सभी कारणों से और यह भी ध्यान रखते हुए कि एप्पल आईओएस का प्रयोग न केवल फोनों, बल्कि आईपैड, और आई पॉड टच आदि में किया जाना है, एप्पल ने इस प्रकार के यंत्रों के लिए आई ओ एस का निर्माण किया। एप्पल के सभी यंत्र ए आर एम प्रोसेसर का प्रयोग करते रहे हैं। अपने यंत्रों की सफलता के लिए एप्पल ने प्रोसेसर, टच स्क्रीन, स्क्रीन का आकार, उसके घुमावदार कोने (जिससे बच्चों या बड़ों को उनके नुकीले कोने से चोट न लग जाये), उसमे लगाया गया कैमरा आदि के बारे उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं का ध्यान रखा है। इसके लिए न केवल हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और उपयोग की सुगमता का ध्यान रखा गया है, बल्कि उसे आकर्षक बनाकर उपभोक्ताओं का मन लुभाया है। अपने संपर्क में आने वाले लोगो की व्यक्तिगत सूचना जैसे उनका पता, फोन नंबर और ई-मेल का पता आदि व्यवस्थित रूप में रखने के लिए व्यक्तिगत सचिव अथवा सेवक का काम कर सकने वाला सबसे प्रसिद्ध यंत्र रोलोडेक्स कहलाया। इस दिशा में पाम इनकार्पोरेटेड द्वारा निर्मित पाम पाइलट भी एक समय बहुत प्रचलन में था, पाम पाइलट का प्रयोग करने वाले लोग आईटी की दुनिया में आधुनिक समझे जाते थे। पाम पाइलट पाम ओएस का प्रयोग करता था। इसी पाम ओएस का प्रयोग करते हुए इस यंत्र में फोन की सुविधा जोड़ते हुए ब्लैक बैरी ने लगभग 7-8 वर्षों तक बाजार में धूम मचा रखी थी। इस बीच एप्पल कंपनी द्वारा निर्मित नैनो और फिर कुछ बड़ी स्क्रीन वाला आईपॉड संगीत प्रेमियों को अपने साथ हर क्षण हजारों गाने रखने और सुनने की सुविधा दे रहा था। एमपी3 गानों की स्वावाभिक सफलता का लाभ उठाने के लिए एप्पल कंपनी ने जो कि सन् 2000 के आस-पास बरबादी के कगार पर थी, सन् 2005 में अपना एक मोबाइल फोन बाजार में उतारने का निर्णय लिया। इस फोन को ग्राहकों तक पहुँचाने से पहले एप्पल कंपनी ने लोगों की आवश्यकताओं और उनकी विशेष माँगें, इन दोनों पर बहुत खोज-बीन की। इसी खोज-बीन का परिणाम एप्पल फोन के रूप में प्रयोगकर्ताओं को मिला। प्रयोगकर्ताओं की माँग और मैक ओएस पर अपनी अच्छी पकड़ के कारण ही एप्पल ने आईओएस का प्रयोग अपने फोन के लिए किया। आईओएस नामक एक और ओएस पहले से ही बाजार में प्रचलित था जिसका मुख्य प्रयोजन नेटवर्क यंत्रों के संचालन के लिए किया जाता था। इस ओएस का पेटेंट सिस्को के पास सुरक्षित था। सन् 2010 में सिस्को ने एप्पल को आईओएस के नाम के प्रयोग की अनुमति दे दी। उस समय तक इस आपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग करते हुए सिस्को को लगभग दो दशक हो चुके थे।

एप्पल ने सन् 2007 में मोबाइल फोन (चलित दूरभाष) का निर्माण करते समय एक नये आपरेटिंग सिस्टम का निर्माण किया, जिसे इन चलित यंत्रों के लिए बनाया गया था। चूँकि इस समय तक प्रचलित सभी प्रकार के डेस्कटाप अथवा व्यक्तिगत संगणकों के आपरेटिंग सिस्टम विशेषतः उनके संचालन के लिए बनाए गये थे, साथ ही उस समय निर्माणाधीन आई फोन के संचालन की आवश्यकताएं भिन्न थीं। उदाहरण के लिए सामान्य डेस्कटाप में जानकारी अथवा प्रयोगकर्ता की आवश्यकताएँ की बोर्ड से कम्प्यूटर को दी जाती हैं। मोबाइल फोन में की-बोर्ड टच स्क्रीन का ही एक हिस्सा होता है और केवल पावर बटन तथा वाल्यूम के बटन ही सामान्य बटनों जैसे लगते हैं। हालाँकि उन्हें भी टच स्क्रीन का हिस्सा बनाया जा सकता है, परंतु आई फोन के निर्माण करने वाले, मनुष्यों की प्रयोगधर्मिता और आदत की मजबूरी इन दोनों बातों का लाभ लेना चाहते थे। इसके अतिरिक्त टच स्क्रीन बिगड़ जाने की स्थिति में फोन को बलपूर्वक निर्देश देने के लिए साधारण स्विचों की तरह यांत्रिक विधि से काम करने वाले बटन भी आवश्यक बन गये।

इसके अतिरिक्त चलित यंत्रों में कई निर्देश उंगलियों और अंगूठे के प्रयोग से होते हैं, जैसे उंगली सरकाना (स्वाइप), टकठकाना (टैप), च्यूंटी लेना (पिंच) और उंगलियाँ फैलाना (रिवर्स पिंच) आदि। इस प्रकार की क्रियाओं की आवश्यकता केवल टच स्क्रीन और वह भी चलित फोनों की छोटी स्क्रीन में पड़ती है। उपर्युक्त इन सभी कारणों से और यह भी ध्यान रखते हुए कि एप्पल आईओएस का प्रयोग न केवल फोनों, बल्कि आईपैड, और आई पॉड टच आदि में किया जाना है, एप्पल ने इस प्रकार के यंत्रों के लिए आई ओ एस का निर्माण किया। एप्पल के सभी यंत्र ए आर एम प्रोसेसर का प्रयोग करते रहे हैं। अपने यंत्रों की सफलता के लिए एप्पल ने प्रोसेसर, टच स्क्रीन, स्क्रीन का आकार, उसके घुमावदार कोने (जिससे बच्चों या बड़ों को उनके नुकीले कोने से चोट न लग जाये), उसमे लगाया गया कैमरा आदि के बारे उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं का ध्यान रखा है। इसके लिए न केवल हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और उपयोग की सुगमता का ध्यान रखा गया है, बल्कि उसे आकर्षक बनाकर उपभोक्ताओं का मन लुभाया है।

एप्पल आई ओ एस मैक ओ एस के आधार पर बनाया गया है। मैक ओ एस बर्कले यूनिवर्सिटी के बीएसडी यूनिक्स के आधार पर बनाया गया था।

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