सन स्पार्क - कर्मेन्द्र कुमार Sun SPARC - Hindi book by - Karmendra Kumar

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सन स्पार्क

कर्मेन्द्र कुमार

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :0
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 16
आईएसबीएन :

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सन माइक्रोसिस्टम्स द्वारा बनाए गये मुख्य धारा के सर्वर और वर्कस्टेशन

सन माइक्रोसिस्टम्स ने सन् 1982 में आरंभ करते हुए सर्वर और वर्क स्टेशन प्रकार के कम्प्यूटर बनाने आरंभ किए। इसी श्रंखला में स्पार्क सिस्टम सन् 1985 में उपभोक्ताओं के सामने प्रस्तुत किए। इस श्रंखला के सर्वरों ने एक अभिनव प्रयोग करते हुए ऐसे निर्देशों का उपयोग किया जिससे कम काम से अधिक फल मिलता था। इन्होंने रिस्क (रिड्यूश्ड इंस्ट्रक्शन सेट कम्प्यूटिंग कहते हैं) माइक्रोप्रोसेसरों का उपयोग किया, जिनका प्रयोग अन्य सर्वर बनाने वाली कम्पनियों जैसे एचपी, डिजिटल और सिलिकन ग्रॉफिक्स (जिनका उपयोग पहली जुरासिक पार्क फिल्म में किया गया था) आदि ने भी अपने कम्प्यूटरों में किया था। अस्सी के दशक से लेकर लगभग 2010 तक इस प्रकार के सर्वर ओपेन सिस्टम्स (मुक्त तंत्रों) को आधुनिक आई टी के जगत् की मुख्य धारा का हिस्सा बने।

इस प्रकार के कम्पयूटरों का अवसान सन् 2008 में अमेरिकन बाजारों में आई भयंकर आर्थिक मंदी तथा लाइनक्स आपरेटिंग सिस्टम और सस्ते इंटेल माइक्रोप्रोसेसर के बाजार में छा जाने के कारण हुआ है।

नब्बे के दशक के उत्तरार्ध और 2000 के आरंभिक वर्षों में सन माइक्रोसिस्टम ने इंटरनेट तथा ई-कामर्स आदि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहाँ तक कि सन डॉट कॉम युग में अपने आपको डॉट अर्थात इंटरनेट का आधार स्तम्भ कहता था!

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